Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.174.42: विद्वान पुरुष को चाहिए कि इस विचार का आश्रय लेकर काम, क्रोध आदि शत्रुओं से अपने मन की रक्षा करते हुए उत्तम आचरण करे। जो सृष्टि और संहार के तत्त्व को जानता है, उसे दुःख छू भी नहीं सकता ॥ 42॥ | mahabharat अध्याय 12.174: शोकाकुल चित्तकी शान्तिके लिये राजा सेनजित् और ब्राह्मणके संवादका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एतां बुद्धिं समास्थाय गुप्तचित्तश्चरेद् बुध:।
उदयास्तमयज्ञं हि न शोक: स्प्रष्टुमर्हति॥ ४२॥
अनुवाद
विद्वान पुरुष को चाहिए कि इस विचार का आश्रय लेकर काम, क्रोध आदि शत्रुओं से अपने मन की रक्षा करते हुए उत्तम आचरण करे। जो सृष्टि और संहार के तत्त्व को जानता है, उसे दुःख छू भी नहीं सकता ॥ 42॥
A learned man should take shelter of this thought and behave well while protecting his mind from enemies like lust, anger etc. One who knows the principle of creation and destruction, grief cannot touch him. ॥ 42॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥