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mahabharat 12.174.39: अतः बुद्धिमान् पुरुष को चाहिए कि जो कुछ भी मिले, चाहे वह सुख हो या दुःख, प्रिय हो या अप्रिय, उसका स्वागत करे और कभी साहस न हारे ॥39॥   |   mahabharat अध्याय 12.174: शोकाकुल चित्तकी शान्तिके लिये राजा सेनजित् और ब्राह्मणके संवादका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 174: शोकाकुल चित्तकी शान्तिके लिये राजा सेनजित् और ब्राह्मणके संवादका वर्णन  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  12.174.39 
सुखं वा यदि वा दु:खं प्रियं वा यदि वाप्रियम्।
प्राप्तं प्राप्तमुपासीत हृदयेनापराजित:॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
अतः बुद्धिमान् पुरुष को चाहिए कि जो कुछ भी मिले, चाहे वह सुख हो या दुःख, प्रिय हो या अप्रिय, उसका स्वागत करे और कभी साहस न हारे ॥39॥
 
Therefore, a wise man should welcome whatever he receives, be it happiness or sorrow, pleasant or unpleasant, and never lose courage. 39॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)