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mahabharat 12.174.35: परंतु जो ज्ञानजन्य सुख से युक्त हैं, जो द्वंद्व से परे हैं और जिनमें ईर्ष्या नहीं है, वे शुभ-अशुभ भाग्य से कभी पीड़ित नहीं होते ॥ 35॥   |   mahabharat अध्याय 12.174: शोकाकुल चित्तकी शान्तिके लिये राजा सेनजित् और ब्राह्मणके संवादका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 174: शोकाकुल चित्तकी शान्तिके लिये राजा सेनजित् और ब्राह्मणके संवादका वर्णन  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  12.174.35 
ये च बुद्धिसुखं प्राप्ता द्वन्द्वातीता विमत्सरा:।
तान् नैवार्था न चानर्था व्यथयन्ति कदाचन॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
परंतु जो ज्ञानजन्य सुख से युक्त हैं, जो द्वंद्व से परे हैं और जिनमें ईर्ष्या नहीं है, वे शुभ-अशुभ भाग्य से कभी पीड़ित नहीं होते ॥ 35॥
 
But those who have the happiness resulting from knowledge, who are beyond conflict and who lack jealousy, are never tormented by good and bad fortune. ॥ 35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)