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mahabharat 12.174.32: दूध देने वाली गाय बछड़े की है, या दूध दुहने वाले ग्वाले की है, या उसे पालने वाले स्वामी की है, या उसे चुराने वाले चोर की है? वास्तव में गाय उसी की है जो उसका दूध पीता है - ऐसा विद्वानों का मत है ॥32॥   |   mahabharat अध्याय 12.174: शोकाकुल चित्तकी शान्तिके लिये राजा सेनजित् और ब्राह्मणके संवादका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.174.32 
धेनुर्वत्सस्य गोपस्य स्वामिनस्तस्करस्य च।
पय: पिबति यस्तस्या धेनुस्तस्येति निश्चय:॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
दूध देने वाली गाय बछड़े की है, या दूध दुहने वाले ग्वाले की है, या उसे पालने वाले स्वामी की है, या उसे चुराने वाले चोर की है? वास्तव में गाय उसी की है जो उसका दूध पीता है - ऐसा विद्वानों का मत है ॥32॥
 
Does the cow that gives milk belong to the calf or to the cowherd who milks it or to the owner who keeps it. Or does it belong to the thief who steals it? In reality, the cow belongs to the one who drinks its milk - this is the opinion of the learned. ॥ 32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)