Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.174.3: हे भरतश्रेष्ठ! जो मनुष्य जिस विषय में भी दृढ़ निश्चय कर लेता है (जिससे उसे अभीष्ट की प्राप्ति निश्चित हो जाती है), वह उसी को अपना कर्तव्य समझता है, अन्य किसी विषय को नहीं॥3॥ | mahabharat अध्याय 12.174: शोकाकुल चित्तकी शान्तिके लिये राजा सेनजित् और ब्राह्मणके संवादका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यस्मिन् यस्मिंस्तु विषये यो यो याति विनिश्चयम्।
स तमेवाभिजानाति नान्यं भरतसत्तम॥ ३॥
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! जो मनुष्य जिस विषय में भी दृढ़ निश्चय कर लेता है (जिससे उसे अभीष्ट की प्राप्ति निश्चित हो जाती है), वह उसी को अपना कर्तव्य समझता है, अन्य किसी विषय को नहीं॥3॥
O best of the Bharatas! Whichever man reaches a firm resolve in whatever matter (by which he is sure of achieving the desired goal), he considers that to be his duty and not any other subject.॥ 3॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥