Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.174.29: अन्यथा न तो मित्र सुख देने में समर्थ हैं, न शत्रु दुःख देने में समर्थ हैं, न बुद्धि में धन देने की शक्ति है और न धन स्वयं सुख देने में समर्थ है। | mahabharat अध्याय 12.174: शोकाकुल चित्तकी शान्तिके लिये राजा सेनजित् और ब्राह्मणके संवादका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
नालं सुखाय सुहृदो नालं दु:खाय शत्रव:।
न च प्रज्ञालमर्थानां न सुखानामलं धनम्॥ २९॥
अनुवाद
अन्यथा न तो मित्र सुख देने में समर्थ हैं, न शत्रु दुःख देने में समर्थ हैं, न बुद्धि में धन देने की शक्ति है और न धन स्वयं सुख देने में समर्थ है।
Otherwise neither friends are capable of giving happiness, nor enemies are capable of giving sorrow, neither intelligence has the power to give wealth nor money itself is capable of giving happiness.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥