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mahabharat 12.174.22: यह जीवन शरीर के साथ ही स्वाभाविक रूप से उत्पन्न होता है। दोनों विभिन्न योनियों में साथ-साथ रहते हैं और साथ-साथ नष्ट हो जाते हैं ॥22॥   |   mahabharat अध्याय 12.174: शोकाकुल चित्तकी शान्तिके लिये राजा सेनजित् और ब्राह्मणके संवादका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.174.22 
जीवितं च शरीरेण जात्यैव सह जायते।
उभे सह विवर्तेते उभे सह विनश्यत:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
यह जीवन शरीर के साथ ही स्वाभाविक रूप से उत्पन्न होता है। दोनों विभिन्न योनियों में साथ-साथ रहते हैं और साथ-साथ नष्ट हो जाते हैं ॥22॥
 
This life naturally arises along with the body. Both live together in various forms and perish together. ॥ 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)