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mahabharat 12.174.20: इस समय तुम सुख से दुःख में गए हो। अब तुम्हें पुनः सुख की प्राप्ति होगी। यहाँ किसी भी प्राणी को सदा सुख या दुःख नहीं मिलता।   |   mahabharat अध्याय 12.174: शोकाकुल चित्तकी शान्तिके लिये राजा सेनजित् और ब्राह्मणके संवादका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.174.20 
सुखात् त्वं दु:खमापन्न: पुनरापत्स्यसे सुखम्।
न नित्यं लभते दु:खं न नित्यं लभते सुखम्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
इस समय तुम सुख से दुःख में गए हो। अब तुम्हें पुनः सुख की प्राप्ति होगी। यहाँ किसी भी प्राणी को सदा सुख या दुःख नहीं मिलता।
 
At this time you have gone from happiness to sorrow. Now you will again attain happiness. Here no creature gets happiness or sorrow forever.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)