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अदर्शनादापतित: पुनश्चादर्शनं गत:।
न त्वासौ वेद न त्वं तं क: सन् किमनुशोचसि॥ १७॥
अनुवाद
तुम्हारा पुत्र अज्ञात लोक से आया था और अब अज्ञात लोक में चला गया है। न तो वह तुम्हें जानता था और न तुम उसे जानती थीं; फिर तुम कौन हो जो उसका शोक मना रहे हो?॥17॥
Your son came from an unknown state and has now gone away in an unknown state. Neither did he know you nor did you know him; then who are you to mourn him?॥ 17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥