Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.174.14: न तो यह शरीर मेरा है और न ही यह सारी पृथ्वी। ये सभी वस्तुएँ जैसे मेरी हैं, वैसे ही दूसरों की भी हैं। ऐसा सोचकर मुझे इनके लिए कोई दुःख नहीं होता। ऐसा समझकर मुझे न तो सुख होता है और न दुःख। | mahabharat अध्याय 12.174: शोकाकुल चित्तकी शान्तिके लिये राजा सेनजित् और ब्राह्मणके संवादका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
आत्मापि चायं न मम सर्वा वा पृथिवी मम।
यथा मम तथाऽन्येषामिति चिन्त्य न मे व्यथा।
एतां बुद्धिमहं प्राप्य न प्रहृष्ये न च व्यथे॥ १४॥
अनुवाद
न तो यह शरीर मेरा है और न ही यह सारी पृथ्वी। ये सभी वस्तुएँ जैसे मेरी हैं, वैसे ही दूसरों की भी हैं। ऐसा सोचकर मुझे इनके लिए कोई दुःख नहीं होता। ऐसा समझकर मुझे न तो सुख होता है और न दुःख।
Neither this body nor the whole earth is mine. All these things belong to others as they belong to me. Thinking this, I do not feel any pain for them. Having this understanding, I neither feel happy nor sad.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥