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mahabharat 12.173.8: हे राजन! एक बार जब बकरों का राजा ब्रह्माजी के दरबार में नहीं पहुँच सका, तब पितामह ने अत्यन्त क्रोधित होकर पक्षीराज को शाप दे दिया और कहा -॥8॥   |   mahabharat अध्याय 12.173: राजधर्मा और गौतमका पुन: जीवित होना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 173: राजधर्मा और गौतमका पुन: जीवित होना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  12.173.8 
यदा बकपती राजन् ब्रह्माणं नोपसर्पति।
ततो रोषादिदं प्राह खगेन्द्राय पितामह:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! एक बार जब बकरों का राजा ब्रह्माजी के दरबार में नहीं पहुँच सका, तब पितामह ने अत्यन्त क्रोधित होकर पक्षीराज को शाप दे दिया और कहा -॥8॥
 
O King! Once when the King of the Goat could not reach the court of Lord Brahma, then the Grand Father became very angry and cursed the King of the Birds and said -॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)