Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.173.21: मनुष्य को विशेष ध्यान रखना चाहिए और विश्वासघात के पाप से बचना चाहिए। जो व्यक्ति अपने मित्र के साथ विश्वासघात करता है, वह अनंत काल तक नरक में जाता है। 21॥   |   mahabharat अध्याय 12.173: राजधर्मा और गौतमका पुन: जीवित होना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 173: राजधर्मा और गौतमका पुन: जीवित होना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  12.173.21 
मित्रद्रोहो न कर्तव्य: पुरुषेण विशेषत:।
मित्रध्रुङ् नरकं घोरमनन्तं प्रतिपद्यते॥ २१॥
 
 
अनुवाद
मनुष्य को विशेष ध्यान रखना चाहिए और विश्वासघात के पाप से बचना चाहिए। जो व्यक्ति अपने मित्र के साथ विश्वासघात करता है, वह अनंत काल तक नरक में जाता है। 21॥
 
Man should pay special attention and avoid the sin of betrayal. A person who betrays his friend goes to hell for eternity. 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)