Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.173.11-12h: तत्पश्चात् राजधर्मा बाकने इन्द्र को प्रणाम करके बोले - 'सुरेश्वर! यदि आपकी मुझ पर कृपा है तो कृपया मेरे प्रिय मित्र गौतम को भी जीवित कर दीजिए।' 11 1/2॥ | mahabharat अध्याय 12.173: राजधर्मा और गौतमका पुन: जीवित होना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
राजधर्मा बक: प्राह प्रणिपत्य पुरन्दरम्।
यदि तेऽनुग्रहकृता मयि बुद्धि: सुरेश्वर॥ ११॥
सखायं मे सुदयितं गौतमं जीवयेत्युत।
अनुवाद
तत्पश्चात् राजधर्मा बाकने इन्द्र को प्रणाम करके बोले - 'सुरेश्वर! यदि आपकी मुझ पर कृपा है तो कृपया मेरे प्रिय मित्र गौतम को भी जीवित कर दीजिए।' 11 1/2॥
Thereafter Rajdharma Bakane bowed to Indra and said – 'Sureshwar! If you have mercy on me then please bring my dear friend Gautam back to life also. 11 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥