Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.172.2-3: बकरों के राजा को भी अपने मित्र पर श्रद्धा थी, इसलिए वह उस समय उसके पास ही सोया था। इतने में ही वह कृतघ्न दुष्टात्मा उसे मार डालने की नीयत से उठा और श्रद्धा से सो रहे राजा को उसके सामने से जलती हुई लकड़ी उठाकर मार डाला। उसे मारकर वह बहुत प्रसन्न हुआ, परन्तु मित्र को मारने से जो पाप लगता है, उसकी ओर उसने ध्यान नहीं दिया॥ 2-3॥ | mahabharat अध्याय 12.172: कृतघ्न गौतमद्वारा मित्र राजधर्माका वध तथा राक्षसोंद्वारा उसकी हत्या और कृतघ्नके मांसको अभक्ष्य बताना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स चापि पार्श्वे सुष्वाप विश्वस्तो बकराट् तदा।
कृतघ्नस्तु स दुष्टात्मा तं जिघांसुरथाग्रत:॥ २॥
ततोऽलातेन दीप्तेन विश्वस्तं निजघान तम्।
निहत्य च मुदा युक्त: सोऽनुबन्धं न दृष्टवान्॥ ३॥
अनुवाद
बकरों के राजा को भी अपने मित्र पर श्रद्धा थी, इसलिए वह उस समय उसके पास ही सोया था। इतने में ही वह कृतघ्न दुष्टात्मा उसे मार डालने की नीयत से उठा और श्रद्धा से सो रहे राजा को उसके सामने से जलती हुई लकड़ी उठाकर मार डाला। उसे मारकर वह बहुत प्रसन्न हुआ, परन्तु मित्र को मारने से जो पाप लगता है, उसकी ओर उसने ध्यान नहीं दिया॥ 2-3॥
The king of goats also had faith in his friend; therefore, he slept near him at that time. Meanwhile, that ungrateful evil soul woke up with the intention of killing him and killed the king who was sleeping with faith by taking a burning stick from his front. After killing him, he was very happy, but he did not pay any attention to the sin that is incurred by killing a friend.॥ 2-3॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥