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mahabharat 12.172.19-20h: दैत्यराज के ऐसा आदेश देने पर भी भयंकर और शक्तिशाली दैत्य गौतम को खाना नहीं चाहते थे, क्योंकि वह महापापी थे।   |   mahabharat अध्याय 12.172: कृतघ्न गौतमद्वारा मित्र राजधर्माका वध तथा राक्षसोंद्वारा उसकी हत्या और कृतघ्नके मांसको अभक्ष्य बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 172: कृतघ्न गौतमद्वारा मित्र राजधर्माका वध तथा राक्षसोंद्वारा उसकी हत्या और कृतघ्नके मांसको अभक्ष्य बताना  »  श्लोक 19-20h
 
 
श्लोक  12.172.19-20h 
इत्युक्ता राक्षसेन्द्रेण राक्षसा घोरविक्रमा:॥ १९॥
नैच्छन्त तं भक्षयितुं पापकर्माणमित्युत।
 
 
अनुवाद
दैत्यराज के ऐसा आदेश देने पर भी भयंकर और शक्तिशाली दैत्य गौतम को खाना नहीं चाहते थे, क्योंकि वह महापापी थे।
 
Even after the King of Demons gave such orders, the fearsome and powerful demons did not wish to eat Gautama because he was a great sinner.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)