Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.172.16-17h: अपने मित्र को इस दशा में देखकर राजा विरुपाक्ष, उनके मंत्री और पुरोहित, फूट-फूट कर रोने लगे। उनके महल में शोक की एक बड़ी चीख गूंज उठी। स्त्रियों और बच्चों सहित सारा नगर शोक में डूब गया। किसी का भी मन अच्छा नहीं था। | mahabharat अध्याय 12.172: कृतघ्न गौतमद्वारा मित्र राजधर्माका वध तथा राक्षसोंद्वारा उसकी हत्या और कृतघ्नके मांसको अभक्ष्य बताना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
रुरोद राजा तं दृष्ट्वा सामात्य: सपुरोहित:।
आर्तनादश्च सुमहानभूत् तस्य निवेशने॥ १६॥
सस्त्रीकुमारं च पुरं बभूवास्वस्थमानसम्।
अनुवाद
अपने मित्र को इस दशा में देखकर राजा विरुपाक्ष, उनके मंत्री और पुरोहित, फूट-फूट कर रोने लगे। उनके महल में शोक की एक बड़ी चीख गूंज उठी। स्त्रियों और बच्चों सहित सारा नगर शोक में डूब गया। किसी का भी मन अच्छा नहीं था।
Seeing his friend in this condition, King Virupaksha along with his ministers and priests started crying profusely. A great cry of sorrow echoed in his palace. The entire city including women and children was filled with grief. No one was in a good mood.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥