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mahabharat 12.172.12-13h: बुद्धिमान राक्षसराज के पुत्र राजधर्मा ने उसकी यह दशा देखकर रोना आरम्भ कर दिया और पूरी शक्ति लगाकर उसने गौतम को शीघ्रता से पकड़ना चाहा ॥12 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 12.172: कृतघ्न गौतमद्वारा मित्र राजधर्माका वध तथा राक्षसोंद्वारा उसकी हत्या और कृतघ्नके मांसको अभक्ष्य बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 172: कृतघ्न गौतमद्वारा मित्र राजधर्माका वध तथा राक्षसोंद्वारा उसकी हत्या और कृतघ्नके मांसको अभक्ष्य बताना  »  श्लोक 12-13h
 
 
श्लोक  12.172.12-13h 
स रुदन्नगमत् पुत्रो राक्षसेन्द्रस्य धीमत:॥ १२॥
त्वरमाण: परं शक्त्या गौतमग्रहणाय वै।
 
 
अनुवाद
बुद्धिमान राक्षसराज के पुत्र राजधर्मा ने उसकी यह दशा देखकर रोना आरम्भ कर दिया और पूरी शक्ति लगाकर उसने गौतम को शीघ्रता से पकड़ना चाहा ॥12 1/2॥
 
Seeing this condition of Rajadharma, the son of the intelligent demon king, he cried and with all his might he tried to catch Gautam quickly. 12 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)