Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.172.10-11h: नीच गौतम यहाँ से लौटकर पुनः अपने निवासस्थान को चले गए हैं; इसलिए मैं व्याकुल हूँ। बेटा! तुम शीघ्र ही यहाँ से राजधर्म के घर जाओ और पता लगाओ कि वह शुद्धात्मा पक्षीराज जीवित है या नहीं। इस कार्य में विलम्ब न करो।'॥10 1/2॥ | mahabharat अध्याय 12.172: कृतघ्न गौतमद्वारा मित्र राजधर्माका वध तथा राक्षसोंद्वारा उसकी हत्या और कृतघ्नके मांसको अभक्ष्य बताना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
गौतम: स गतस्तत्र तेनोद्विग्नं मनो मम।
पुत्र शीघ्रमितो गत्वा राजधर्मनिवेशनम्॥ १०॥
ज्ञायतां स विशुद्धात्मा यदि जीवति मा चिरम्।
अनुवाद
नीच गौतम यहाँ से लौटकर पुनः अपने निवासस्थान को चले गए हैं; इसलिए मैं व्याकुल हूँ। बेटा! तुम शीघ्र ही यहाँ से राजधर्म के घर जाओ और पता लगाओ कि वह शुद्धात्मा पक्षीराज जीवित है या नहीं। इस कार्य में विलम्ब न करो।'॥10 1/2॥
‘The lowly Gautama had returned from here and again gone to his residence; that is why I am agitated. Son! You should quickly go from here to the house of Rajadharma and find out whether that pure souled bird king is alive or not. Do not delay this task.'॥10 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥