Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.171.31-32: भोजन करके विश्राम करने के बाद गौतम इस प्रकार चिंता करने लगे - 'हाय! मैंने लोभ और मोह के वशीभूत होकर सुन्दर स्वर्ण का यह विशाल भार उठा लिया है। मुझे अभी बहुत दूर जाना है। रास्ते में खाने को कुछ भी नहीं है, जिससे मेरे प्राण बच सकें।' | mahabharat अध्याय 12.171: गौतमका राक्षसराजके यहाँसे सुवर्णराशि लेकर लौटना और अपने मित्र बकके वधका घृणित विचार मनमें लाना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स भुक्तवान् सुविश्रान्तो गौतमोऽचिन्तयत् तदा।
हाटकस्याभिरूपस्य भारोऽयं सुमहान् मया॥ ३१॥
गृहीतो लोभमोहाभ्यां दूरं च गमनं मम।
न चास्ति पथि भोक्तव्यं प्राणसंधारणं मम॥ ३२॥
अनुवाद
भोजन करके विश्राम करने के बाद गौतम इस प्रकार चिंता करने लगे - 'हाय! मैंने लोभ और मोह के वशीभूत होकर सुन्दर स्वर्ण का यह विशाल भार उठा लिया है। मुझे अभी बहुत दूर जाना है। रास्ते में खाने को कुछ भी नहीं है, जिससे मेरे प्राण बच सकें।'
After eating and resting, Gautama started worrying like this - 'Oh! I have taken this huge load of beautiful gold driven by greed and attachment. I still have to go a long way. There is nothing to eat on the way, which can save my life.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥