श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 171: गौतमका राक्षसराजके यहाँसे सुवर्णराशि लेकर लौटना और अपने मित्र बकके वधका घृणित विचार मनमें लाना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  12.171.30 
तस्य पक्षाग्रविक्षेपै: क्लमं व्यपनयत् खग:।
पूजां चाप्यकरोद् धीमान् भोजनं चाप्यकल्पयत्॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
बुद्धिमान पक्षी ने अपने पंखों के अगले भाग को हिलाकर उसे हवा दी और उसकी सारी थकान दूर कर दी; फिर उसने उसकी पूजा की और उसके लिए भोजन की व्यवस्था की।
 
The intelligent bird moved the front part of its wings to give him air and relieve him of all his fatigue; then it worshipped him and arranged for food for him. 30.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)