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mahabharat 12.171.29: राजन! तत्पश्चात् पक्षियों में श्रेष्ठ मित्र राजधर्म ने गौतम के पास आकर उनका स्वागत किया ॥29॥   |   mahabharat अध्याय 12.171: गौतमका राक्षसराजके यहाँसे सुवर्णराशि लेकर लौटना और अपने मित्र बकके वधका घृणित विचार मनमें लाना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 171: गौतमका राक्षसराजके यहाँसे सुवर्णराशि लेकर लौटना और अपने मित्र बकके वधका घृणित विचार मनमें लाना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  12.171.29 
ततस्तमभ्यगाद् राजन् राजधर्मा खगोत्तम:।
स्वागतेनाभिनन्दंश्च गौतमं मित्रवत्सल:॥ २९॥
 
 
अनुवाद
राजन! तत्पश्चात् पक्षियों में श्रेष्ठ मित्र राजधर्म ने गौतम के पास आकर उनका स्वागत किया ॥29॥
 
Rajan! Thereafter, the best friend among the birds, Rajadharma came to Gautam and welcomed him. 29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)