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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 171: गौतमका राक्षसराजके यहाँसे सुवर्णराशि लेकर लौटना और अपने मित्र बकके वधका घृणित विचार मनमें लाना
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श्लोक 23
श्लोक
12.171.23
इत्युक्तवचने तस्मिन् राक्षसेन्द्रे महात्मनि।
यथेष्टं तानि रत्नानि जगृहुर्ब्राह्मणर्षभा:॥ २३॥
अनुवाद
महाबली दैत्यराज की यह बात सुनकर ब्राह्मणों ने इच्छानुसार सब रत्न ले लिए॥ 23॥
Upon hearing the great king of demons say this, the Brahmins took all the gems as per their wish.॥ 23॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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