Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.171.2: विरुपाक्ष ने गौतम से उसके वंश, सम्प्रदाय और ब्रह्मचर्य पालन करते हुए किए गए अध्ययन के विषय में पूछा; परन्तु गौतम ने उसे अपने वंश (जाति) के अतिरिक्त कुछ भी नहीं बताया॥ 2॥ | mahabharat अध्याय 12.171: गौतमका राक्षसराजके यहाँसे सुवर्णराशि लेकर लौटना और अपने मित्र बकके वधका घृणित विचार मनमें लाना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पृष्टश्च गोत्रचरणं स्वाध्यायं ब्रह्मचारिकम्।
न तत्र व्याजहारान्यद् गोत्रमात्रादृते द्विज:॥ २॥
अनुवाद
विरुपाक्ष ने गौतम से उसके वंश, सम्प्रदाय और ब्रह्मचर्य पालन करते हुए किए गए अध्ययन के विषय में पूछा; परन्तु गौतम ने उसे अपने वंश (जाति) के अतिरिक्त कुछ भी नहीं बताया॥ 2॥
Virupaksha asked Gautama about his lineage, sect and the studies he had done while observing celibacy; but Gautama did not tell him anything except his lineage (caste).॥ 2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥