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श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 171: गौतमका राक्षसराजके यहाँसे सुवर्णराशि लेकर लौटना और अपने मित्र बकके वधका घृणित विचार मनमें लाना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  12.171.18 
विशेषतस्तु कार्तिक्यां द्विजेभ्य: सम्प्रयच्छति।
शरद् व्यपाये रत्नानि पौर्णमास्यामिति श्रुति:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
ऐसा सुना जाता है कि वे विशेष रूप से कार्तिक पूर्णिमा के दिन, जब शरद ऋतु समाप्त हो जाती है, ब्राह्मणों को बहुमूल्य रत्न दान किया करते थे ॥18॥
 
It is heard that he used to donate precious stones to Brahmins especially on the full moon day of Kartika, when the autumn season comes to an end. ॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)