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mahabharat 12.171.1: भीष्मजी कहते हैं - राजन! तत्पश्चात राजा को उनके आगमन की सूचना दी गई और वे अपने उत्तम भवन में चले गए। वहाँ राक्षसराज ने उनका विधिपूर्वक पूजन किया। तत्पश्चात वे उत्तम आसन पर बैठ गए। 1॥   |   mahabharat अध्याय 12.171: गौतमका राक्षसराजके यहाँसे सुवर्णराशि लेकर लौटना और अपने मित्र बकके वधका घृणित विचार मनमें लाना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 171: गौतमका राक्षसराजके यहाँसे सुवर्णराशि लेकर लौटना और अपने मित्र बकके वधका घृणित विचार मनमें लाना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  12.171.1 
भीष्म उवाच
तत: स विदितो राज्ञ: प्रविश्य गृहमुत्तमम्।
पूजितो राक्षसेन्द्रेण निषसादासनोत्तमे॥ १॥
 
 
अनुवाद
भीष्मजी कहते हैं - राजन! तत्पश्चात राजा को उनके आगमन की सूचना दी गई और वे अपने उत्तम भवन में चले गए। वहाँ राक्षसराज ने उनका विधिपूर्वक पूजन किया। तत्पश्चात वे उत्तम आसन पर बैठ गए। 1॥
 
Bhishmaji says – King! Thereafter the king was informed of his arrival and he entered his fine palace. There the demon king worshiped him duly. After that he sat on a good seat. 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)