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mahabharat 12.170.8: तब पक्षी ने उनके लिए पत्तों का एक दिव्य बिस्तर तैयार किया, जो फूलों से युक्त होने के कारण सुगंध से सुगन्धित था। उसने उसे गौतम को दे दिया और गौतम उस पर सुखपूर्वक सो गए।   |   mahabharat अध्याय 12.170: गौतमका राजधर्माद्वारा आतिथ्यसत्कार और उसका राक्षसराज विरूपाक्षके भवनमें प्रवेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 170: गौतमका राजधर्माद्वारा आतिथ्यसत्कार और उसका राक्षसराज विरूपाक्षके भवनमें प्रवेश  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  12.170.8 
तस्मै पर्णमयं दिव्यं दिव्यपुष्पाधिवासितम्।
गन्धाढॺं शयनं प्रादात् स शिश्ये तत्र वै सुखम्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
तब पक्षी ने उनके लिए पत्तों का एक दिव्य बिस्तर तैयार किया, जो फूलों से युक्त होने के कारण सुगंध से सुगन्धित था। उसने उसे गौतम को दे दिया और गौतम उस पर सुखपूर्वक सो गए।
 
Then the bird prepared a divine bed of leaves for him, which was fragrant with aroma due to being inhabited by flowers. He gave it to him and Gautama slept comfortably on it. 8.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)