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भुक्तवन्तं च तं विप्रं प्रीतात्मानं महातपा:।
क्लमापनयनार्थं स पक्षाभ्यामभ्यवीजयत्॥ ६॥
अनुवाद
जब ब्राह्मण ने मछली पकाकर खा ली और उसका मन तृप्त हो गया, तब महातपस्वी पक्षी उसकी थकान दूर करने के लिए अपने पंखों से उसे पंखा झलने लगा ॥6॥
When the brahmin had cooked and eaten the fish and his soul was satiated, then the great ascetic bird began to fan him with its wings to dispel his fatigue. ॥ 6॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥