Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.170.5: उस कश्यपपुत्र ने अग्नि प्रज्वलित की और बड़ी-बड़ी मछलियाँ लाकर अपने अतिथि गौतम को खिला दीं॥5॥   |   mahabharat अध्याय 12.170: गौतमका राजधर्माद्वारा आतिथ्यसत्कार और उसका राक्षसराज विरूपाक्षके भवनमें प्रवेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 170: गौतमका राजधर्माद्वारा आतिथ्यसत्कार और उसका राक्षसराज विरूपाक्षके भवनमें प्रवेश  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  12.170.5 
वह्निं चापि सुसंदीप्तं मीनांश्चापि सुपीवरान्।
स गौतमायातिथये न्यवेदयत काश्यपि:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
उस कश्यपपुत्र ने अग्नि प्रज्वलित की और बड़ी-बड़ी मछलियाँ लाकर अपने अतिथि गौतम को खिला दीं॥5॥
 
That son of Kashyap lit the fire and brought big fish and offered it to his guest Gautam. 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)