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श्लोक  12.170.3 
भीष्म उवाच
तस्मै दत्त्वा स सत्कारं विधिदृष्टेन कर्मणा।
शालपुष्पमयीं दिव्यां बृसीं वै समकल्पयत् ॥ ३॥
 
 
अनुवाद
भीष्म कहते हैं - युधिष्ठिर! ऐसा कहकर राजा ने शास्त्र विधि के अनुसार गौतम का स्वागत किया। उन्होंने साल के फूलों का आसन बनाकर उन्हें बैठने के लिए दिया।
 
Bhishma says - Yudhishthira! Having said this, the king welcomed Gautama according to the rules of the scriptures. He made a seat of sal flowers and gave it to him to sit.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)