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mahabharat 12.170.26: मन में दैत्यराज के दर्शन की इच्छा लेकर ब्राह्मण अपने सेवकों के साथ शीघ्र ही राजमहल पहुँच गया।   |   mahabharat अध्याय 12.170: गौतमका राजधर्माद्वारा आतिथ्यसत्कार और उसका राक्षसराज विरूपाक्षके भवनमें प्रवेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 170: गौतमका राजधर्माद्वारा आतिथ्यसत्कार और उसका राक्षसराज विरूपाक्षके भवनमें प्रवेश  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  12.170.26 
तैरेव सहितो राज्ञो वेश्म तूर्णमुपाद्रवत्।
दर्शनं राक्षसेन्द्रस्य कांक्षमाणो द्विजस्तदा॥ २६॥
 
 
अनुवाद
मन में दैत्यराज के दर्शन की इच्छा लेकर ब्राह्मण अपने सेवकों के साथ शीघ्र ही राजमहल पहुँच गया।
 
With the desire to see the King of Demons in his mind the Brahmin along with his servants soon reached the royal palace.
 
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि आपद्धर्मपर्वणि कृतघ्नोपाख्याने सप्तत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १७०॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत आपद्धर्मपर्वमें कृतघ्नका उपाख्यानविषयक एक सौ सत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १७०॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)