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mahabharat 12.170.25: पुकार सुनते ही गौतम की थकान दूर हो गई। वे विस्मित होकर दौड़े। राक्षसराज की महान समृद्धि देखकर उन्हें बड़ा आश्चर्य हुआ॥ 25॥   |   mahabharat अध्याय 12.170: गौतमका राजधर्माद्वारा आतिथ्यसत्कार और उसका राक्षसराज विरूपाक्षके भवनमें प्रवेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 170: गौतमका राजधर्माद्वारा आतिथ्यसत्कार और उसका राक्षसराज विरूपाक्षके भवनमें प्रवेश  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  12.170.25 
तत: स प्राद्रवद् विप्रो विस्मयाद् विगतक्लम:।
गौतम: परमर्धिं तां पश्यन् परमविस्मित:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
पुकार सुनते ही गौतम की थकान दूर हो गई। वे विस्मित होकर दौड़े। राक्षसराज की महान समृद्धि देखकर उन्हें बड़ा आश्चर्य हुआ॥ 25॥
 
Gautama's fatigue vanished as soon as he heard the call. He ran in amazement. He was amazed to see the great prosperity of the demon king.॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)