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mahabharat 12.170.23: महाराज! उस समय राजा के उन सेवकों ने उस ब्राह्मण से कहा - 'ब्राह्मण! शीघ्र आओ। महाराज तुमसे मिलना चाहते हैं॥ 23॥   |   mahabharat अध्याय 12.170: गौतमका राजधर्माद्वारा आतिथ्यसत्कार और उसका राक्षसराज विरूपाक्षके भवनमें प्रवेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.170.23 
ते तमूचुर्महाराज राजप्रेष्यास्तदा द्विजम्।
त्वरस्व तूर्णमागच्छ राजा त्वां द्रष्टुमिच्छति॥ २३॥
 
 
अनुवाद
महाराज! उस समय राजा के उन सेवकों ने उस ब्राह्मण से कहा - 'ब्राह्मण! शीघ्र आओ। महाराज तुमसे मिलना चाहते हैं॥ 23॥
 
Maharaj! At that time those servants of the king said to that Brahmin - 'Brahman! Hurry up. Come soon. Maharaj wants to meet you.॥ 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)