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mahabharat 12.170.22: यह आदेश पाकर राजसेवक बाजों की तरह दौड़े और गौतम को पुकारते हुए उस उत्तम नगर के द्वार पर पहुँचे।   |   mahabharat अध्याय 12.170: गौतमका राजधर्माद्वारा आतिथ्यसत्कार और उसका राक्षसराज विरूपाक्षके भवनमें प्रवेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.170.22 
तत: पुरवरात् तस्मात् पुरुषा: श्येनचेष्टना:।
गौतमेत्यभिभाषन्त: पुरद्वारमुपागमन्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
यह आदेश पाकर राजसेवक बाजों की तरह दौड़े और गौतम को पुकारते हुए उस उत्तम नगर के द्वार पर पहुँचे।
 
On receiving these orders, the royal servants rushed like hawks to the gate of that excellent city, calling out to Gautama.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)