Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.170.2: राजधर्मा ने कहा- हे ब्राह्मणश्रेष्ठ! मैं महर्षि कश्यप का पुत्र हूँ। मेरी माता दक्ष प्रजापति की पुत्री हैं। आप पुण्यात्मा अतिथि हैं, मैं आपका स्वागत करता हूँ॥ 2॥ | mahabharat अध्याय 12.170: गौतमका राजधर्माद्वारा आतिथ्यसत्कार और उसका राक्षसराज विरूपाक्षके भवनमें प्रवेश । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
राजधर्मोवाच
भो: कश्यपस्य पुत्रोऽहं माता दाक्षायणी च मे।
अतिथिस्त्वं गुणोपेत: स्वागतं ते द्विजोत्तम॥ २॥
अनुवाद
राजधर्मा ने कहा- हे ब्राह्मणश्रेष्ठ! मैं महर्षि कश्यप का पुत्र हूँ। मेरी माता दक्ष प्रजापति की पुत्री हैं। आप पुण्यात्मा अतिथि हैं, मैं आपका स्वागत करता हूँ॥ 2॥
Rajdharma said- O best of the Brahmins! I am the son of Maharishi Kashyap. My mother is the daughter of Daksha Prajapati. You are a virtuous guest, I welcome you.॥ 2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥