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mahabharat 12.17.3: जो सम्राट सम्पूर्ण जगत् पर अकेले शासन करता है, उसका तो एक ही पेट है; फिर तुम इस राज्य की प्रशंसा क्यों करते हो?॥3॥   |   mahabharat अध्याय 12.17: युधिष्ठिरद्वारा भीमकी बातका विरोध करते हुए मुनिवृत्तिकी और ज्ञानी महात्माओंकी प्रशंसा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.17.3 
य इमामखिलां भूमिं शिष्यादेको महीपति:।
तस्याप्युदरमेकं वै किमिदं त्वं प्रशंससि॥ ३॥
 
 
अनुवाद
जो सम्राट सम्पूर्ण जगत् पर अकेले शासन करता है, उसका तो एक ही पेट है; फिर तुम इस राज्य की प्रशंसा क्यों करते हो?॥3॥
 
The emperor who rules the whole world alone has only one stomach; so why do you praise this kingdom?॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)