Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.17.23: जब मनुष्य जीवों की पृथक सत्ता को एकमात्र ईश्वर में स्थित देखता है और मानता है कि समस्त सत्ताएँ उसी ईश्वर से विस्तारित हुई हैं, तब वह सच्चिदानन्दघन ब्रह्म को प्राप्त होता है ॥23॥ | mahabharat अध्याय 12.17: युधिष्ठिरद्वारा भीमकी बातका विरोध करते हुए मुनिवृत्तिकी और ज्ञानी महात्माओंकी प्रशंसा । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यदा भूतपृथग्भावमेकस्थमनुपश्यति।
तत एव च विस्तारं ब्रह्म सम्पद्यते तदा॥ २३॥
अनुवाद
जब मनुष्य जीवों की पृथक सत्ता को एकमात्र ईश्वर में स्थित देखता है और मानता है कि समस्त सत्ताएँ उसी ईश्वर से विस्तारित हुई हैं, तब वह सच्चिदानन्दघन ब्रह्म को प्राप्त होता है ॥23॥
When man sees the separate existence of living beings as situated in the only God and believes that all existences have expanded from that God, then he attains Sachchidanandaghan Brahma. 23॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥