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mahabharat 12.17.22: जो ब्रह्मभाव को प्राप्त हुए शुद्धात्मा विद्वान् की भाँति बोलना सीखता है, उसे अपने ज्ञान का बड़ा अभिमान हो जाता है (जैसा कि तुम हो)।॥ 22॥   |   mahabharat अध्याय 12.17: युधिष्ठिरद्वारा भीमकी बातका विरोध करते हुए मुनिवृत्तिकी और ज्ञानी महात्माओंकी प्रशंसा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.17.22 
यस्तु वाचं विजानाति बहुमानमियात् स वै।
ब्रह्मभावप्रपन्नानां वैद्यानां भावितात्मनाम्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
जो ब्रह्मभाव को प्राप्त हुए शुद्धात्मा विद्वान् की भाँति बोलना सीखता है, उसे अपने ज्ञान का बड़ा अभिमान हो जाता है (जैसा कि तुम हो)।॥ 22॥
 
He who learns to speak like a scholar of pure soul who has attained Brahmabhaav, becomes very proud of his knowledge (as you are).॥ 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)