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mahabharat 12.17.16: तप, ब्रह्मचर्य और स्वाध्याय के बल पर महर्षि मृत्यु के बाद ऐसे लोक में पहुँचते हैं जहाँ मृत्यु का प्रवेश नहीं होता ॥16॥   |   mahabharat अध्याय 12.17: युधिष्ठिरद्वारा भीमकी बातका विरोध करते हुए मुनिवृत्तिकी और ज्ञानी महात्माओंकी प्रशंसा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.17.16 
तपसा ब्रह्मचर्येण स्वाध्यायेन महर्षय:।
विमुच्य देहांस्ते यान्ति मृत्योरविषयं गता:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
तप, ब्रह्मचर्य और स्वाध्याय के बल पर महर्षि मृत्यु के बाद ऐसे लोक में पहुँचते हैं जहाँ मृत्यु का प्रवेश नहीं होता ॥16॥
 
With the help of penance, celibacy and self-study, Maharishis reach such a world after death where death has no entry. 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)