Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.17.14: जिन्होंने सांसारिक सुखों का त्याग कर दिया है, वे कभी शोक नहीं करते; फिर तुम सांसारिक सुखों की चिंता क्यों करते हो? समस्त सांसारिक सुखों का त्याग करने से तुम मिथ्या विश्वासों से मुक्त हो जाओगे ॥14॥ | mahabharat अध्याय 12.17: युधिष्ठिरद्वारा भीमकी बातका विरोध करते हुए मुनिवृत्तिकी और ज्ञानी महात्माओंकी प्रशंसा । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जिन्होंने सांसारिक सुखों का त्याग कर दिया है, वे कभी शोक नहीं करते; फिर तुम सांसारिक सुखों की चिंता क्यों करते हो? समस्त सांसारिक सुखों का त्याग करने से तुम मिथ्या विश्वासों से मुक्त हो जाओगे ॥14॥
Those who have renounced worldly pleasures never grieve; then why do you worry about worldly pleasures? By renouncing all worldly pleasures you will be free from false beliefs. ॥14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥