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mahabharat 12.169.7: सभी ऋतुओं में पुष्पित आम्र वृक्षों की पंक्तियां उस वन की शोभा बढ़ा रही थीं। यक्षों और किन्नरों से सेवित वह प्रदेश नंदनवन के समान सुन्दर प्रतीत हो रहा था।   |   mahabharat अध्याय 12.169: गौतमका समुद्रकी ओर प्रस्थान और संध्याके समय एक दिव्य बकपक्षीके घरपर अतिथि होना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 169: गौतमका समुद्रकी ओर प्रस्थान और संध्याके समय एक दिव्य बकपक्षीके घरपर अतिथि होना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  12.169.7 
सर्वर्तुकैराम्रवणै: पुष्पितैरुपशोभितम्।
नन्दनोद्देशसदृशं यक्षकिन्नरसेवितम्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
सभी ऋतुओं में पुष्पित आम्र वृक्षों की पंक्तियां उस वन की शोभा बढ़ा रही थीं। यक्षों और किन्नरों से सेवित वह प्रदेश नंदनवन के समान सुन्दर प्रतीत हो रहा था।
 
Rows of mango trees blooming in all seasons were enhancing the beauty of that forest. That region served by Yakshas and Kinnars appeared as beautiful as Nandanavan. 7.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)