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mahabharat 12.169.6: उस समय उसे समुद्र की ओर जाने वाला एक मार्ग मिला और उस पर चलते हुए वह एक दिव्य और सुन्दर वन में पहुँच गया। वहाँ के सभी वृक्ष सुन्दर पुष्पों से सुशोभित थे।   |   mahabharat अध्याय 12.169: गौतमका समुद्रकी ओर प्रस्थान और संध्याके समय एक दिव्य बकपक्षीके घरपर अतिथि होना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 169: गौतमका समुद्रकी ओर प्रस्थान और संध्याके समय एक दिव्य बकपक्षीके घरपर अतिथि होना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  12.169.6 
स पन्थानमथासाद्य समुद्राभिसरं तदा।
आससाद वनं रम्यं दिव्यं पुष्पितपादपम्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
उस समय उसे समुद्र की ओर जाने वाला एक मार्ग मिला और उस पर चलते हुए वह एक दिव्य और सुन्दर वन में पहुँच गया। वहाँ के सभी वृक्ष सुन्दर पुष्पों से सुशोभित थे।
 
At that time he found a path leading to the sea and by following it he reached a divine and beautiful forest. All the trees there were adorned with beautiful flowers. 6.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)