Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.169.5: वह वणिकों के समूह को छोड़कर उस देश से भी विमुख होकर उस वन में अकेला ही विचरण करने लगा, मानो कोई किम्पुरुष विचरण कर रहा हो ॥5॥ | mahabharat अध्याय 12.169: गौतमका समुद्रकी ओर प्रस्थान और संध्याके समय एक दिव्य बकपक्षीके घरपर अतिथि होना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स तु सार्थपरिभ्रष्टस्तस्माद् देशात् तथा च्युत:।
एकाकी व्यचरत् तत्र वने किंपुरुषो यथा॥ ५॥
अनुवाद
वह वणिकों के समूह को छोड़कर उस देश से भी विमुख होकर उस वन में अकेला ही विचरण करने लगा, मानो कोई किम्पुरुष विचरण कर रहा हो ॥5॥
He left the group of traders and thus, being estranged from that land also, he started wandering alone in that forest, as if a Kimpurusha was roaming about. ॥ 5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥