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mahabharat 12.169.24: आप मेरे घर आए हुए प्रिय एवं अद्भुत अतिथि हैं। मैं आज शास्त्रानुसार आपका पूजन करूँगा। कृपया आज रात्रि में मेरा आतिथ्य स्वीकार करें और कल प्रातःकाल यहाँ से प्रस्थान करें।॥ 24॥   |   mahabharat अध्याय 12.169: गौतमका समुद्रकी ओर प्रस्थान और संध्याके समय एक दिव्य बकपक्षीके घरपर अतिथि होना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 169: गौतमका समुद्रकी ओर प्रस्थान और संध्याके समय एक दिव्य बकपक्षीके घरपर अतिथि होना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  12.169.24 
मम त्वं निलयं प्राप्त: प्रियातिथिरनिन्दित:।
पूजितो यास्यसि प्रातर्विधिदृष्टेन कर्मणा॥ २४॥
 
 
अनुवाद
आप मेरे घर आए हुए प्रिय एवं अद्भुत अतिथि हैं। मैं आज शास्त्रानुसार आपका पूजन करूँगा। कृपया आज रात्रि में मेरा आतिथ्य स्वीकार करें और कल प्रातःकाल यहाँ से प्रस्थान करें।॥ 24॥
 
You are a dear and wonderful guest to my house. I will worship you today according to the scriptures. Please accept my hospitality tonight and leave from here tomorrow morning.॥ 24॥
 
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि आपद्धर्मपर्वणि कृतघ्नोपाख्याने एकोनसप्तत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १६९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत आपद्धर्मपर्वमें कृतघ्नका उपाख्यानविषयक एक सौ उनहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १६९॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)