श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 169: गौतमका समुद्रकी ओर प्रस्थान और संध्याके समय एक दिव्य बकपक्षीके घरपर अतिथि होना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  12.169.23 
राजधर्मोवाच
स्वागतं भवतो विप्र दिष्टॺा प्राप्तोऽसि मे गृहम्।
अस्तं च सविता यात: संध्येयं समुपस्थिता॥ २३॥
 
 
अनुवाद
राजधर्मा (निकट आकर) बोले- ब्राह्मण! आपका स्वागत है। यह मेरा घर है। यह मेरे लिए सौभाग्य की बात है कि आप यहाँ आए हैं। सूर्य अस्त हो चुका है। संध्या का समय हो गया है।
 
Rajdharma (coming near) said- Brahmin! You are welcome. This is my house. It is a matter of great fortune for me that you have come here. The Sun has set. It is evening time.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)