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राजधर्मोवाच
स्वागतं भवतो विप्र दिष्टॺा प्राप्तोऽसि मे गृहम्।
अस्तं च सविता यात: संध्येयं समुपस्थिता॥ २३॥
अनुवाद
राजधर्मा (निकट आकर) बोले- ब्राह्मण! आपका स्वागत है। यह मेरा घर है। यह मेरे लिए सौभाग्य की बात है कि आप यहाँ आए हैं। सूर्य अस्त हो चुका है। संध्या का समय हो गया है।
Rajdharma (coming near) said- Brahmin! You are welcome. This is my house. It is a matter of great fortune for me that you have come here. The Sun has set. It is evening time.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥