श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 169: गौतमका समुद्रकी ओर प्रस्थान और संध्याके समय एक दिव्य बकपक्षीके घरपर अतिथि होना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  12.169.21 
मृष्टाभरणसम्पन्नो भूषणैरर्कसंनिभै:।
भूषित: सर्वगात्रेषु देवगर्भ: श्रिया ज्वलन्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
उसके शरीर के अंग सूर्यदेव की किरणों के समान उज्ज्वल आभूषणों से सुशोभित थे। वह देवकुमार समस्त अंगों से पवित्र, दिव्य आभूषणों से सुशोभित तथा दिव्य तेज से देदीप्यमान था। 21॥
 
Her body parts were adorned with ornaments as bright as the rays of the Sun God. That Devkumar was pure in all his body parts and adorned with divine ornaments and was resplendent with divine light. 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)