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mahabharat 12.169.2: मार्ग में उसने देखा कि समुद्र के किनारे रहने वाले कुछ व्यापारी और वैश्य वहाँ ठहरे हुए हैं। वह उनके समूह में शामिल हो गया और समुद्र की ओर चल पड़ा॥ 2॥   |   mahabharat अध्याय 12.169: गौतमका समुद्रकी ओर प्रस्थान और संध्याके समय एक दिव्य बकपक्षीके घरपर अतिथि होना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.169.2 
सामुद्रिकान् स वणिजस्ततोऽपश्यत् स्थितान् पथि।
स तेन सह सार्थेन प्रययौ सागरं प्रति॥ २॥
 
 
अनुवाद
मार्ग में उसने देखा कि समुद्र के किनारे रहने वाले कुछ व्यापारी और वैश्य वहाँ ठहरे हुए हैं। वह उनके समूह में शामिल हो गया और समुद्र की ओर चल पड़ा॥ 2॥
 
On the way he saw that some traders and Vaishyas living near the sea were staying there. He joined their group and started going towards the sea.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)