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mahabharat 12.169.17: उस पवित्र वायु का स्पर्श पाकर गौतम को बड़ी शांति मिली। वे प्रसन्न होकर वहीं लेट गए। सूर्य भी वहीं अस्त हो गया॥17॥   |   mahabharat अध्याय 12.169: गौतमका समुद्रकी ओर प्रस्थान और संध्याके समय एक दिव्य बकपक्षीके घरपर अतिथि होना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 169: गौतमका समुद्रकी ओर प्रस्थान और संध्याके समय एक दिव्य बकपक्षीके घरपर अतिथि होना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  12.169.17 
स तु विप्र: प्रशान्तश्च स्पृष्ट: पुण्येन वायुना।
सुखमासाद्य सुष्वाप भास्करश्चास्तमभ्ययात्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
उस पवित्र वायु का स्पर्श पाकर गौतम को बड़ी शांति मिली। वे प्रसन्न होकर वहीं लेट गए। सूर्य भी वहीं अस्त हो गया॥17॥
 
Gautama felt very peaceful after getting the touch of that holy air. He lay down there feeling happy. The sun also set there.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)