Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.169.16: कुन्तीनंदन! गौतम के वहाँ बैठते ही पुष्पों का स्पर्श करके सुन्दर, मृदुल और सुगन्धित वायु बहने लगी, जो अत्यन्त सुखदायी और कल्याणकारी प्रतीत हो रही थी। हे मनुष्यों! वह गौतम के समस्त अंगों को आनन्द प्रदान कर रही थी॥ 16॥ | mahabharat अध्याय 12.169: गौतमका समुद्रकी ओर प्रस्थान और संध्याके समय एक दिव्य बकपक्षीके घरपर अतिथि होना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कुन्तीनंदन! गौतम के वहाँ बैठते ही पुष्पों का स्पर्श करके सुन्दर, मृदुल और सुगन्धित वायु बहने लगी, जो अत्यन्त सुखदायी और कल्याणकारी प्रतीत हो रही थी। हे मनुष्यों! वह गौतम के समस्त अंगों को आनन्द प्रदान कर रही थी॥ 16॥
Kunti Nandan! As soon as Gautam sat there, a beautiful, soft and fragrant wind started blowing after touching the flowers, which seemed very pleasant and beneficial. O Lord of men! It was giving joy to all the limbs of Gautam.॥ 16॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥