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mahabharat 12.169.14: वह वृक्ष भगवान ब्रह्मा के दरबार जैसा लग रहा था और दिव्य पुष्पों से सुशोभित था। गौतम उस सुंदर बरगद के वृक्ष को देखकर अत्यंत प्रसन्न हुए।   |   mahabharat अध्याय 12.169: गौतमका समुद्रकी ओर प्रस्थान और संध्याके समय एक दिव्य बकपक्षीके घरपर अतिथि होना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 169: गौतमका समुद्रकी ओर प्रस्थान और संध्याके समय एक दिव्य बकपक्षीके घरपर अतिथि होना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  12.169.14 
दिव्यपुष्पान्वितं श्रीमत् पितामहसभोपमम्।
तं दृष्ट्वा गौतम: प्रीतो मन:कान्तमनुत्तमम्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
वह वृक्ष भगवान ब्रह्मा के दरबार जैसा लग रहा था और दिव्य पुष्पों से सुशोभित था। गौतम उस सुंदर बरगद के वृक्ष को देखकर अत्यंत प्रसन्न हुए।
 
That tree looked like the court of Lord Brahma and was adorned with divine flowers. Gautama was very pleased to see that beautiful banyan tree.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)