Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.168.51: ‘विप्रेन्द्र! आज आपसे मिलकर मैं बहुत कृतज्ञ हूँ। ब्रह्मन्! अब आप रात्रि यहीं ठहरें, कल प्रातःकाल हम दोनों साथ चलेंगे।’॥51॥   |   mahabharat अध्याय 12.168: मित्र बनाने एवं न बनाने योग्य पुरुषोंके लक्षण तथा कृतघ्न गौतमकी कथाका आरम्भ   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 168: मित्र बनाने एवं न बनाने योग्य पुरुषोंके लक्षण तथा कृतघ्न गौतमकी कथाका आरम्भ  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  12.168.51 
त्वद्दर्शनात् तु विप्रेन्द्र कृतार्थोऽस्म्यद्य वै द्विज।
आवां हि सह यास्याव: श्वो वसस्वाद्य शर्वरीम्॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
‘विप्रेन्द्र! आज आपसे मिलकर मैं बहुत कृतज्ञ हूँ। ब्रह्मन्! अब आप रात्रि यहीं ठहरें, कल प्रातःकाल हम दोनों साथ चलेंगे।’॥51॥
 
‘Viprendra! I am very grateful to have met you today. Brahman! Now stay here for the night, tomorrow morning we both will go together.'॥ 51॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)